Beginning of the Universe (हिंदी में )

Beginning of the Universe in Hindi language
Beginning of the Universe in Hindi language

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MCME Theory for Beginning of the Universe in Hindi Language (Theory Based on Dhyana and Yogic Practice)



ब्रह्माण्ड की शुरुवात कैसे हुई , इस बारे में अब तक बहुत सी थ्योरी पब्लिश हो चुकी हैं , इनमे सबसे नवीनतम है स्ट्रिंग थ्योरी या थ्योरी ऑफ़ एवरीथिंग। इसके अलावा सिम्युलेशन थ्योरी भी काफी प्रचलन में है जिसके अनुसार सारा ब्रह्माण्ड एक कम्प्यूटर प्रोग्राम हो सकता है। लेकिन इस आर्टिक्ल में, में आपको खुद के ध्यान अनुभव के आधार पर ब्रह्माण्ड की उतपत्ति के बारे में बताने की कोसिस कर रहा हूँ। आशा है इससे आपके बहुत सारे सवालों के जवाब मिल जाएंगे। मैंने इस शरीर और आस पास के वातावरण और परवरिश के हिसाब से जिन शब्दों को जाना है उनका ही प्रतीकात्मक रूप में उपयोग करते हुए आप तक ये मेसेज पहुंचा रहा हूँ। अगर आपको पसंद आये तो आप इसे अन्य भाषा में ट्रांसलेट करके पोस्ट कर सकते हैं।

प्रतीकात्मक शब्दावली सहित वर्णन -

सबसे पहले बिना किसी आकार या गुण वाला आकाश तत्व था , ये तत्व अब भी वैसा ही है , बस आज तक उसका कोई भी नाम नहीं दिया गया तो हम उसे परम् शून्य से समझेंगे। परम् शून्य से शुरुवाती 2 गुण अलग हुए , एक परम् अन्धकार और दूसरा परम् प्रकाश। (ऐसा तकरीबन हर ध्यान विधि को करने वाले अनुभव करते हैं )

शुरुवाती दो गुण - सदाशिव 
इसमें गहनतम काले गुण वाला अनंत तत्व सदा के रूप में, और अनंत प्रकाशमय तत्व शिव के रूप में चिन्हित किया गया है। 

इन दो गुणों को हम शिवः के नाम से भी जानते हैं , इसमें "शि" का अर्थ है "वह जो है (यानी पदार्थ के प्रारम्भ का निमित मात्र (महा अन्धकार या महा मृत्यु ), न की पदार्थ)", तथा "वः" का अर्थ है "वह जो नहीं है (यानी अपदार्थ या ऊर्जा के प्रारम्भ का निमित मात्र (परम् प्रकाश या परम् धाम), न की खुद ऊर्जा)"

शुरुवाती दोनों गुणों से एक परमपिता परमात्मा का सृजन हुआ , चूँकि तब तक आकार की कोई कल्पना ही नहीं थी , तो हमने उस निराकार , परम् ऊर्जावान और परम् सक्षम को महाकाल का नाम दिया (वैज्ञानिक संदेह में थे के बिग बेन्ग से पहले क्या था , अब उस काल्पनिक तत्व को वो स्ट्रिंग या गॉड पार्टिकल आदि नाम दे रहे हैं। )

महाकाल ने फिर अपने में से 2 तत्वों का निर्माण किया , एक काल और एक भगवान् शिव , इन दोनों में पदार्थ और ऊर्जा दोनों गुण थे। इतनी अत्याधिक ऊर्जा थी के सारा पदार्थ, यानी पदार्थ रूपी काल और शिव , ऊर्जा रूपी काल और शिव के कारण एक बिंदु में सिमट गए। (वैज्ञानिक आधार पर ये बिग बेन्ग का प्रथम बिंदु था , लेकिन वो ये बताने में असमर्थ रहे के महाविस्फोट कैसे हुआ ) 

जब महाकाल को लगा की अब आगे कुछ होना चाहिए तो उन्होंने एक और ख़ास तत्व की रचना की , जो की चुंबकीय क्षेत्र (या जिसे माया कहते हैं) और बदलाव को सम्हालने की ताकत रखता हो (वैज्ञानिकों ने इस तत्व को बोसॉन नाम दिया है लेकिन वो सिर्फ इसकी कल्पना कर रहे हैं) , में प्रतीकात्मक रूप में इस तत्व को शक्ति के रूप में व्यक्त  करूँगा। इसे यूँ भी कह सकते हैं "शिव को सम्हालने के लिए शक्ति (माँ दुर्गा) का सृजन होना ", लेकिन ये सिर्फ मूल तत्व के रूप में थे तब तक कोई अवतार नहीं था। 

शक्ति ने उस शून्य पदार्थ के दो चुंबकीय पदार्थ बनाये और वो एक दूसरे से चिपके रहे (जैसे अगर आप दो चुंबकों का पास लाते हैं तो वो एक दूसरे से चिपक जाते हैं )। सारा पदार्थ उन दो चुंबकीय क्षेत्रों के बीच फस गया , जिससे एक अलग तरह की ऊर्जा पैदा हुई जिसने एक चुंबक रूपी पदार्थ का छोर बदल दिया और वहीँ से बिग बेन्ग की शुरुवात हुई (उदहारण के तौर पर अगर आप दो चिपके हुए चुंबकों में से किसी एक का छोर बदलेंगे तो वो बड़ी तेजी से एक दूसरे को अपने से दूर धकेलेंगे)। 

ये चुंबकीय क्षेत्र और पदार्थ इतनी अधिक मात्रा में था के ये अनंत तक फैलता ही चला गया। इसके बाद, एक सीमा के बाद जब उन दो छोरों के बीच धकेलने की ऊर्जा लायक दुरी, नहीं बची तो उनमे से कोई एक सिरा फिर से पलट गया तथा दोनों चुंबक फिर से एक दूसरे को अपनी तरफ खींचने लगे(वैज्ञानिक इस प्रक्रिया को बिग क्रंच का नाम देते हैं )। 

ऐसा जब बार बार होने लगा तो शिवः तत्व ने शक्ति तत्व के साथ एक और तत्व को पैदा किया जो अनगिनत मात्रा में ऐसे चुंबकीय क्षेत्र और पदार्थ पैदा करने ने सक्षम हो, प्रतीक की तौर पर हम उसे विष्णु तत्व शब्द से जानेंगे ("वैज्ञानिक इसे ब्लेक हॉल/व्हाइट हॉल आदि नाम दे के रखे हैं")।  

यहीं से इस प्रक्रिया को रचनात्मक बनाने के लिए उपर्लिखित तत्वों द्वारा एक नए तत्व का सृजन किया गया जिसे वैज्ञानिक "टाइम और स्पेस" शब्दों से परिभाषित करते हैं। असल में ये स्वयं ब्रह्मा तत्व है , जिन्होंने एक जयमितीय आधार पर ब्रह्माण्ड की रचना की , इससे पहले अनंत काल तक ऐसी संरचना पर प्रयोग चलते रहे और सबसे आश्चर्य की बात ये हैं के ये प्रयोग तत्व स्तर पर तत्वों द्वारा ही होते रहे हैं। जो आज भी जारी हैं ताकि कुछ नया बनाया जा सके। 

इसके बाद की सच्चाई अगले आर्टिकल में आपसे शेयर करूँगा। अगर आपको आर्टिक्ल पसंद आया तो कमेंट करके जरूर बताये और इस आर्टिकल को विभिन्न माध्यमों से अपने दोस्तों, जानकारों के साथ जरूर शेयर करें।

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