Real human potential in Hindi

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Real human potential in Hindi

What is real human potential ? (मानव की वास्तविक क्षमता क्या है ?)


मानव की असली क्षमता क्या है ?
अपनी आत्मरक्षा तक बुद्धि का उपयोग करके इसे साइड कर देना ही मानव की असली क्षमता है। अगर आपके शरीर को किसी से कोई खतरा नहीं है या फिर यूँ कहें के आपने अपनी दैनिक जरूरतों सम्बंधित चीजों की व्यवस्था कर ली है तो प्रकृति की इस अद्भुत संरचना का आनंद लेना ही मानव की असली क्षमता है। जो मानव ऐसा करने में सक्षम है वही जागा हुआ यानी के असली इन्सान है। और जो सब कुछ जुटाने के बाद भी और जोड़ने के चक्कर में बुद्धि और मन में उलझा रहता है वो मानव शरीर में पशु, यानी के सोया हुआ है।

जागे हुए इन्सान और सोये हुए इंसान में क्या फर्क है ?
जो सोया है वो हर समय विचारों में खोया है , उसकी बुद्धि हर समय कोई निष्कर्ष निकालती रहती है। जो जाग जाता है वो अपने शरीर का पूर्ण उपयोग करता है। उसकी बुद्धि और मन उसी समय काम करते हैं जब इसकी जरुरत होती है। बाकी समय जब वो चुप होता है तो उसके मन में कोई विचार नहीं चलते। हां अगर वो चाहे तो किसी ख़ास व्यक्ति का ध्यान करके उसके लिए अपने विचार प्रेषित कर सकता है , इसे टेलीपैथी कहते हैं। जिस समय सामने वाले का मन शांत होता है तो उसकी बुद्धि उन विचार तरंगो को पकड़ लेती है। तो अगर आपकी बुद्धि विचारों को नियंत्रित करना नहीं जानती तो आप सोये हुए हो , फिर आपके लिए कुछ नया सीख पाना मुश्किल है। अगर आपकी बुद्धि खुद को नियंत्रित करने में सक्षम है तो आप हर पल आनन्दित रह सकते हैं।

क्या बुद्धि से कुछ जाना जा सकता है ?
निश्चित ही नहीं , बुद्धि केवल उपयोग को जानती है। बुद्धि सिर्फ वस्तुवों को नाम देके , उसे जान जाने का भ्र्म पैदा करती है। जैसे आपका मोबाइल , बुद्धि इसे मोबाइल नाम देकर सिर्फ इसका उपयोग करना जानती है। जिन्होंने मोबाइल बनाया उनकी बुद्धि कुछ अलग अलग कॉम्पोनेन्ट को इकठ्ठा करके उनका एक अलग तरिके से उपयोग करना जानती है। क्या आपकी बुद्धि जानती है के अभी तक आपने जो पढ़ा वो कम्प्यूटर या मोबाइल के प्रोसेसर के लिए सिर्फ 0 और 1 का कॉम्बिनेशन मात्र है। फिर इस प्रोसेसर में ऐसी क्या खासियत है जो इन कॉम्बिनेशंस को शब्दों में बदल देता है। जिन्होंने इसे बनाया है उनकी बुद्धि भी केवल इसका उपयोग करना जानती है। आज विज्ञानं क्वांटम कम्प्यूटर तक जा चूका है जिसमे एक बिट में 0 और 1 सुपर पोजीसन में रहते हैं , लेकिन मानव बुद्धि केवल उसका उपयोग करना जानती है। ऐसा कैसे होता है ये बुद्धि की पहुँच से परे है। तो अंततः बुद्धि से कुछ भी नहीं जाना जा सकता उपयोग के सिवाय। वस्तुवों का उपयोग करना तो पशु पक्षी भी जानते हैं तो फिर मानव और बाकी जीवों में क्या फर्क हुआ ?

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